IMMUNE SYSTEM ( मानव प्रतिरक्षा तन्त्र )
जब कोई बाहरी जीवाणु तथा विषाणु शरीर में प्रवेश करता है तो हमारे शरीर में उपस्थित प्रतिरक्षा अनुक्रिया काम करता है और दुश्मन की पहचान और उसकी ताकत का अन्दाजा लगाकर उसपे आक्रमण कर पराजित कर देता है।
अगर हम इसके परिभाषा की बात करें तो कुछ इस प्रकार से होगा
" प्रतिरक्षा प्रणाली किसी जीव के भीतर होने वाली उन जैविक प्रक्रियाओं का संग्रह है, जो रोगजनकों और अर्बुद कोशिकाओं को पहले पहचान और फिर मार कर उस जीव की रोगो से रक्षा करती है ।"
अगर हम इसके परिभाषा की बात करें तो कुछ इस प्रकार से होगा
" प्रतिरक्षा प्रणाली किसी जीव के भीतर होने वाली उन जैविक प्रक्रियाओं का संग्रह है, जो रोगजनकों और अर्बुद कोशिकाओं को पहले पहचान और फिर मार कर उस जीव की रोगो से रक्षा करती है ।"
CELLULAR THEORY OF IMMUNITY ( प्रतिरक्षा का कोशिकावाद ) किसने दिया -
सन् 1884 में सर मेशिनकाफ ( Metchnkoff) नें प्रतिरक्षा का कोशिकावाद प्रस्तुत किया । उन्होने पाया कि भषण या भक्षी ( phagocytes ) कोशिकाएं , आक्रमण करने वाली कोशिकाओं का भक्षण करती है।
इसके बाद दो (2) प्रतिरक्षा वाद का विकास हु्आ
इसके बाद दो (2) प्रतिरक्षा वाद का विकास हु्आ
पहला वाद (ह्यूमोरलवाद प्रतिरक्षा तन्त्र ) -
एन्टीबाडी (Antibody ) का निर्माण हमारे शरीर में कैसे होता है
सन् 1890 में बेहरिंग तथा कितासातो नें पाया कि ऐसे व्यक्ति या जन्तु के रक्त में ( जो किसी रोग से पीड़ित हो चुका हो ) ऐसे पदार्थ पाए जाते है जो उस विशेष रोग के रोगाणु द्वारा उत्पन्न विषाक्त पदार्थों को निष्क्रिय कर देते हैं। ये पदार्थ एण्टीटाक्सिन कहलाए ।
सीरम या रक्त में पाया जाने वाला यही पदार्थ प्रतिरक्षी (Antibody) कहलाया ।
प्रतिरक्षा का यह वाद ह्यूमोरलवाद कहलाया ।
दूसरा वाद (कोशिका मध्यस्थज प्रतिरक्षा तन्त्र )
antigen
एण्टीजन ( Antigen ) का निर्माण हमारे शरीर में कैसे होता है
इस प्रणाली की सबसे विशेष बात यह है कि इसमें अपनी तथा बाहरी कोशिकाओं में विभेदन की क्षमता होती है । बाहर से आने वाली कोशिकाएं या अन्य कोई पदार्थ प्रतिजनी ( Antigen ) कहलाता है ।
अधिकांश प्रतिजन प्रोटीन या कार्बोहाइड्रेटयुक्त बड़े अणु होते है ।
सभी प्रतिजनी जीवाणु नहीं होते ( परागकण प्रतिरोपित ऊतक आदि सभी बाहरी पदार्थ प्रतिजनी होते है।




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